अस्थमा का खतरा दोगुना कर सकता है बचपन में होने वाला रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन

बचपन में होने वाले रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन अक्सर सामान्य माने जाते हैं, लेकिन हाल ही में किए गए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है। शोधकर्ताओं की टीम ने पाया है कि रेस्पिरेटरी सिसिटियल वायरस (आरएसवी) का संक्रमण बच्चों में आगे चलकर अस्थमा होने की संभावना को काफी बढ़ा सकता है। यह निष्कर्ष चिकित्सा जगत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आरएसवी को अब सिर्फ एक आम सर्दी-जुकाम जैसा संक्रमण नहीं माना जा सकता।

आरएसवी आखिर क्यों खतरनाक माना जा रहा है?
साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है कि आरएसवी संक्रमण सिर्फ अस्थायी समस्या नहीं पैदा करता, बल्कि यह बच्चे की इम्यून प्रणाली पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। खास बात यह है कि यह जोखिम उन बच्चों में ज्यादा होता है जिनके परिवार में पहले से अस्थमा या एलर्जी का इतिहास मौजूद हो। यानी जेनेटिक एलर्जी और आरएसवी संक्रमण मिलकर अस्थमा का खतरा दोगुना कर सकते हैं।

बेल्जियम के फ्लैंडर्स इंस्टीट्यूट फॉर बायोटेक्नोलॉजी और गेंट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बर्ट लंब्रेक्ट के अनुसार,

बचपन में अस्थमा कई कारणों से होता है, लेकिन शुरुआती उम्र में आरएसवी संक्रमण और जेनेटिक एलर्जी के मिलेजुले प्रभाव से इम्यून सिस्टम अस्थमा के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।

स्टडी में कैसे पता चला यह संबंध?
इस शोध में डेनमार्क के बच्चों और उनके माता-पिता के हेल्थ रजिस्ट्री डेटा का विश्लेषण किया गया। इससे पता चला कि:

जीवन के शुरुआती महीनों में यदि बच्चे को आरएसवी का गंभीर संक्रमण होता है,
और साथ ही उसमें विरासत में मिली एलर्जी की प्रवृत्ति भी मौजूद हो,
तो दोनों कारक एक-दूसरे के प्रभाव को बढ़ाते हैं। परिणामस्वरूप बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य एलर्जेन- जैसे घर की धूल के प्रति भी अत्यधिक संवेदनशील हो सकती है।

अध्ययन के अनुसार, ऐसे बच्चों में इम्यून सेल्स की प्रतिक्रिया सामान्य से अधिक तेज हो जाती है, जो आगे चलकर अस्थमा के विकास में प्रमुख भूमिका निभा सकती है।

आरएसवी से बचाव क्यों है जरूरी?
अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि अगर शुरुआती उम्र में आरएसवी संक्रमण से बचाव किया जाए, तो जीवन में आगे अस्थमा का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे संकेत मिलता है कि नवजात शिशुओं में आरएसवी की रोकथाम केवल तत्काल स्वास्थ्य लाभ ही नहीं देती, बल्कि यह उनके भविष्य के श्वसन स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

माता-पिता के लिए क्या सीख?
जिन बच्चों के परिवार में अस्थमा या एलर्जी का इतिहास हो, उन्हें आरएसवी संक्रमण से विशेष रूप से बचाना चाहिए।
छोटे बच्चों में वायरल संक्रमण को हल्के में न लें, खासकर श्वसन संबंधी लक्षणों को।
घर का वातावरण धूल और एलर्जेन से मुक्त रखने की कोशिश करें।

यह नया अध्ययन बताता है कि बच्चों का स्वास्थ्य केवल वर्तमान नहीं, भविष्य को भी प्रभावित करता है। आरएसवी संक्रमण को रोककर बच्चों में आगे चलकर अस्थमा होने का खतरा काफी कम किया जा सकता है। इसलिए बच्चों को संक्रमण से बचाना और समय पर सही देखभाल करना बेहद जरूरी है। यह उनके आने वाले वर्षों की सांसों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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