
भारत और यूरोपीय संघ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने के करीब हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वा डेर लेयेन ने इस डील को मदर आफ आल डील बताया है। आइए जानते हैं
इस समझौते से भारत को यूरोप बाजार में किस तरह की बढ़त मिल सकती है।
अमेरिका का विकल्प
यह समझौता वस्त्र, आभूषण, चमड़े के सामान आदि जैसे अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित भारतीय श्रम- प्रधान उद्योगों के लिए एक वैकल्पिक बाजार खोलेगा और उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ में भारतीय वस्त्रों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगता है, जबकि बांग्लादेशी वस्त्रों पर कोई शुल्क नहीं लगता है, जिसे यह मुक्त समझौता दूर कर देगा। यह भारतीय आइटी/सेवा निर्यात और कुशल पेशेवरों के आवागमन के लिए भी एक वैकल्पिक बाजार प्रदान करेगा जिससे अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी।
ट्रंप की व्यापार नीतियों ने किया मजबूर
इस समझौते में हुई तीव्र प्रगति बदलती वैश्विक भू-राजनीति का परिणाम है। 2013 में विराम लगने के बाद जुन, 2022 में वार्ता को फिर शुरू किया गया था। हाल के ट्रंप प्रशासन द्वारा व्यापार नीतियों में किए गए परिवर्तनों के बाद इस में और अधिक तेजी आई। इन परिवर्तनों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अधिक संरक्षणवादी रुख की ओर मोड़ दिया और पारंपरिक अमेरिकी व्यापार भागीदारों को वैकल्पिक बाजारों की तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया।
इसमें भारत से सभी आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाना, यूरोपीय संघ से आयात पर 20 प्रतिशत का आधारभूत शुल्क और यूरोपीय संघ से आयातित इस्पात और एल्युमीनियम पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाना शामिल था। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ विनिर्माण क्षेत्र में चीन के प्रभुत्व को लेकर भी चिंतित हैं।
कम होगी चीन पर निर्भरता
विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं और मजबूत आर्थिक लचीलेपन के माध्यम से चीन पर निर्भरता कम होती है। यह नवीकरणीय ऊर्जा घटकों जैसे भारतीय उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल बाजार प्रदान करता है, जो चीनी वस्तुओं की कीमतों से प्रभावित होने के कारण उत्पादन बढ़ाने में असमर्थ हैं।
भारत को मिलेगी 27 देशों तक पहुंच
भारत के लिहाज से देखें तो यूरोपीय संघ विश्व के सबसे विकसित आर्थिक गुटों में से एक है। इसका संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2026 में 22.52 ट्रिलियन डालर होगा, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग छठा हिस्सा है।
इस समझौते से भारत को यूरोपीय संघ के 27 देशों में फैले एक बड़े और स्थिर बाजार तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, आटोमोटिव कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रानिक्स आदि क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।इससे अधिक निवेश, सह-विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत को चीन की अधिक उन्नत अर्थव्यवस्था के साथ अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।
यूरोपीय संघ को मिलेगा बड़ा बाजार
भारत के अलावा यह समझौता यूरोपीय संघ को भी काफी फायदा पहुंचाएगा। भारत और यूरोपीय संघ के बीच पहले से ही मजबूत व्यापारिक संबंध हैं, वित्त वर्ष 2024 में द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य 135 अरब डालर था। यह साझेदारी परस्पर पूरक है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
आइएमएफ ने वित्त वर्ष 2024-26 के बीच 7.3 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है। इसकी 1.46 अरब की आबादी यूरोपीय संघ को एक विशाल बाजार प्रदान करेगी, जिससे अमेरिका या चीन से जुड़े व्यापारिक झटकों से निपटने में मदद मिलेगी।



