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निजी स्कूल आर.टी.ई. की प्रतिपूर्ति के लिए गए उच्च न्यायालय, न्यायालय ने दिया सरकार को नोटिस!

लखनऊ, 30 मई 2019। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऐसोसियेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स, उ0प्र0 की याचिका पर केन्द्र सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार दोनो को, नोटिस भेजा हैं जिसमें शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 12(2) के तहत निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति करने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने माननीय हाई कोर्ट से प्रार्थना की है कि अधिनियम की धारा 12(1)(ग) को ’अल्ट्रा वायरीज’ (अधिनियम के विरूद्ध) घोषित किया जाये, क्योंकि सरकार द्वारा निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क दाखिलों के लिए प्रतिपूर्ति नियमानुसार (आर.टी.ई. की धारा 12(2) के तहत) नहीं दी जा रही है। यह पूर्णतया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) का उल्लंघन है एवं माननीय उच्चतम न्यायालय के 12.04.2012 के निर्णय के भी विरूद्ध है, जो यह कहता है कि निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क दाखिला देना है और जिसके लिए स्कूलों को आर.टी.ई. अधिनियम की धारा 12(2) के अन्तर्गत प्रतिपूर्ति दी जायेगी।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 12(2) में वर्णित है कि सरकारी स्कूलों में प्रति-छात्र व्यय एवं निजी स्कूल की फीस में जो भी धनराशि कम होगी, उसी धनराशि की प्रतिपूर्ति निजी स्कूलों को की जायेगी। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा के अधिकार नियमावली 2011 के नियम 8(2) में सरकारी स्कूलों में प्रति-छात्र खर्च की गणना का फार्मूला भी दिया गया है, जिसे सरकारी गजट के माध्यम से प्रत्येक वर्ष की 30 सितम्बर को प्रकाशित करना अनिवार्य था, लेकिन सरकार ने अभी तक ऐसा नहीं किया।यहाँ उल्लेखनीय है की निजी स्कूल पिछले कई महीनो से पुरजोर कोशिश करते आ रहें हैं कि सरकार शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 12(2) के तहत निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति दे, लेकिन शासन ने अभी तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। जिसके उपरांत निजी स्कूलों ने अब न्यायालय की शरण ले ली है और पहले ही दिन न्यायालय ने उन्हें कुछ राहत जरूर दे दी है।

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