Saturday , May 25 2019

तू जिंदा है वल्लाह… मेरे चश्मे आलम से छुप जाने वाले : मुफ्ती अख्तर

गोरखपुर के खूनीपुर में ‘जश्न-ए-गौसे आजम’ जलसा

गोरखपुर : नव वर्ष पर नौजवान कमेटी की ओर से खूनीपुर निकट बेलाली मस्जिद ‘जश्न-ए-गौसे आजम’ जलसा का आयोजन हुआ। संचालन मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने किया। जलसा की अध्यक्षता करते हुए मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार के मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि अल्लाह ने दुनिया को बनाने के बाद सबसे आला दर्जा इंसान को अता किया और इस सिलसिले में उनकी हिदायत व रहनुमाई के लिए पैगंबरों (नबी व रसूल) का सिलसिला जारी फरमाया। जिसकी आखिरी कड़ी बनकर पैगंबरों के सरदार हमारे रसूल-ए-पाक (हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) तशरीफ लाये। आपने चालीस साल की उम्र में नुबूवत का ऐलान किया। रसूल-ए-पाक आखिरी पैगंबर हैं। आप क़यामत तक पूरी इंसानियत के लिए पैगंबर बना कर भेजे गए। आप सारी कायनात के लिए रहमत भी है। आपके बाद नुबूवत व रिसालत का दरवाजा हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। आप को दीन-ए-कामिल अता किया गया। चुनांचे क़यामत तक सिर्फ और सिर्फ दीन-ए-इस्लाम ही इंसानों के लिए हिदायत की राह है।

रसूल-ए-पाक और तमाम पैगंबर जिंदा हैं। रसूल-ए-पाक ने फरमाया कि अल्लाह ने जमीन पर पैगंबरों के जिस्मों को खाना हराम फरमा दिया है, तो अल्लाह के पैगंबर जिंदा हैं। उन्हें रिज्क़ दिया जाता है। उन्होंने नात पढ़ी ” तू जिंदा है वल्लाह, तू जिंदा है वल्लाह, मेरे चश्मे आलम से छुप जाने वाले, तेरा खायें तेरे गुलामों से उलझें, हैं मुन्किर अजब खाने गुर्राने वाले”। उन्होंने कहा कि रसूल-ए-पाक के बाद इंसानों की हिदायत के लिए अल्लाह ने रसूल-ए-पाक का नायब उलेमा व औलिया को बनाया। जिनके जरिए इंसानों की हिदायत का काम हो रहा है। रसूल-ए-पाक अल्लाह की अता से अपने चाहने वालों का दरुदो-सलाम सुनते हैं। फरियादियों की फरियाद भी सुनते हैं और अल्लाह की दी हुई ताकत से उनके दुख-दर्द दूर करते हैं। रसूल-ए-पाक कयामत में गुनाहगार उम्मतियों की शफाअत करेंगे। हमें रसूल-ए-पाक पर कसरत से दरुदो- सलाम का नजराना पेश करना चाहिए। अल्लाह ने अपनी जात के बाद हर खूबी और कमाल का जामे रसूल-ए-पाक को बनाया। अल्लाह ने अपने तमाम खजानों की कुंजियां रसूल-ए-पाक को अता फरमा दीं। दीन व दुनिया की तमाम नेमतों का देने वाला अल्लाह है और बांटने वाले रसूल-ए-पाक अलैहिस्सलाम हैं।

मुख्य वक्ता गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद ने कहा कि अल्लाह ने अपने बंदों की हिदायत के लिए अपने पैगंबरों पर विभिन्न किताबें और सहीफे नाजिल (उतारे) किए। अल्लाह ने हजरत मूसा पर तौरेत, हजरत दाऊद पर जबूर, हजरत ईसा पर इंजील और दीगर पैगंबरों पर दूसरी किताबें या सहीफे नाजिल फरमायी। इन पैगंबरों की उम्मतों ने इन किताबों को घटा या बढ़ा दिया और अल्लाह के हुक्म को बदल डाला। तब अल्लाह ने हमारे प्यारे आक़ा रसूल-ए-पाक (हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) पर क़ुरआन-ए-पाक नाजिल फ़रमाया। क़ुरआन-ए-पाक में हर चीज का इल्म है। क़ुरआन-ए-पाक इब्तेदा-ए-इस्लाम से आज तक वैसा ही है जैसा नाजिल हुआ था और हमेशा वैसा ही रहेगा। क़ुरआन-ए-पाक पर ईमान लाना हर शख्स पर लाजिम है। अब न कोई पैगंबर पैदा होने वाला है और न कोई किताब आने वाली है।

उन्होंने कहा कि क़ुरआन-ए-पाक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की एक पूर्ण किताब है ताकि हम अल्लाह की महानता और उसकी शक्ति से अवगत हो सकें। क़ुरआन-ए-पाक में इल्म और आलिम (ज्ञान और ज्ञानी) को अत्यधिक महत्व दिया गया है क्योंकि यह इल्म (ज्ञान) ही है जो इंसान को अज्ञानता के अंधकार से बाहर निकालता है और मानवता का पराकाष्ठता की ओर मार्गदर्शन करता है। ज्ञान के द्वारा ही इंसान क़ुरआन के आशय और पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं से परिचित होता है। उलेमा ने हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां की जिंदगी पर रोशनी डाली। तिलावत कारी नसीमुल्लाह ने की। नात हाफिज शहबाज मिस्बाही ने पेश की। अंत में सलातो सलाम पढ़कर दुआ मांगी गयी। इस मौके पर हाफिज शाकिब कदर, आस्ताना बहादुरिया-मिस्कीनिया के खादिम फिरोज अहमद नेहाली, नईमुद्दीन, अली कदर, नौशाद अली, हाफिज मजहर, मो. सरफराज, माहताब आलम, मो. हामिद शाह, सैयद शाहिद, मो. छोटू कुरैशी, हाफिज कमरुद्दीन, हाफिज गुलाम रसूल, मौलाना इब्राहिम, मौलाना फैजुल्लाह कादरी, कारी शराफत हुसैन कादरी आदि लोग मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com