Wednesday , October 16 2019

शराब के सेवन से देश में बढ़ रहे फैटीलिवर डिज़ीज़ के मामले : डॉ.गोयल

इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर ने दी जानकारी
हर साल दो लाख लोग होते हैं लिवर की बीमारियों के शिकार

मुरादाबाद : दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल्स द्वारा मुरादाबाद में ‘शराब के बढ़ते सेवन और फैटी लिवर डिज़ीज़’ पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। सत्र का नेतृत्व डा नीरव गोयल, सीनियर कन्सलटेन्ट-लिवर ट्रांसप्लान्ट विभाग, इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली के द्वारा किया गया। सत्र के दौरान मरीजों को बताया गया कि शराब के सेवन के कारण आजकल फैटी लिवर डिज़ीज़ के मामले बढ़ रहे हैं। वरिष्ठ डॉक्टरों ने रोग के प्रबंधन और इलाज के तरीकों के बारे में भी लोगों को जानकारी दी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार देश में हर साल 10 लाख लोगों में लिवर सिरहोसिस का निदान किया जाता है और हर साल लगभग दो लाख लोगों की मृत्यु लिवर की बीमारियों के कारण हो जाती है।

डॉ नीरव गोयल ने कहा, गतिहीन जीवन शैली, ज़्यादा शराब का सेवन, ज़्यादा वसा एवं कॉलेस्ट्रॉल से युक्त आहार का सेवन और व्यायाम की कमी भारत में बढ़ते लिवर रोगों के मुख्य कारण हैं। ज़्यादा शराब के उन्होंने कहा, ज़्यादा मात्रा में शराब का सेवन करने से एल्कॉहलिक लिवर सिरहोसिस हो सकता है जो लिवर रोगों का दूसरा मुख्य कारण है। शराब का सेवन जारी रखने से समय के साथ लिवर के स्वस्थ टिश्यूज़ खराब होने लगते हैं। अक्सर ऐसे मामलों में लिवर ट्रांसप्लान्ट ही इलाज का एकमात्र विकल्प रह जाता है। पेट में दर्द, असामान्य मल, थकान, मतली, उल्टी, बुखार, भूख में कमी, पेट या टांगों में सूजन, रक्त स्राव, पेशाब का रंग गहरा होना, पीलिया आदि लिवर रोगों के आम लक्षण हैं।

डॉ गोयल ने कहा, लिवर रोगों को चार अवस्थाओं में बांटा जा सकता है, शुरूआती अवस्था,जिसमें लिवर या बाईल डक्ट में सूजन आ जाती है। इस अवस्था का इलाज कर रोग को दूसरी अवस्था तक पहुंचने से रोका जा सकता है। दूसरी अवस्था को फाइब्रोसिसऑफ द लिवर कहा जाता है। इस अवस्था में खराब हो चुके टिश्यूज़ के कारण लिवर को खून के सामान्य प्रवाह में रुकावट आने लगती है। हालांकि समय पर इलाज के द्वारा रोग को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। सिरहोसिस ऑफ द लिवर तीसरी और क्रोनिक अवस्था होती है, जिसमें लिवर के टिश्यूज़ को स्थायी नुकसान पहुंचने के कारण रक्त का प्रवाह रुक जाता है। लिवर फेलियर और अडवान्स्ड लिवररोग अंतिम अवस्था है जिसमें लिवर अपने सभी सामान्य कार्य करना बंद कर देता है। हालांकि लिवर सिरहोसिस को लिवर फेलियर तक पहुंचने में सालों लग जाते हैं, लेकिन इस नुकसान को ठीक करना असंभव होता है और अंततः मरीज़ की मृत्यु हो जाती है। ऐसे मामलों में लिवर ट्रांसप्लान्ट ही इलाज का एकमात्र विकल्प रह जाता है।

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